Yug Purush

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8TH SEMESTER ! भाग- 126( Bloody End of 3rd Semester- 6)

"तेरा बाप,पीछे मूड..."

ये सुनते ही मैं गुस्से से उबलने लगा और तुरंत पीछे मुड़ा. पर पीछे मुड़कर मैं कुछ  देखता ,कुछ  समझता या फिर कुछ  कहता उससे पहले ही मेरे माथे पर सामने से किसी ने किसी चीज से जोरदार प्रहार किया और मैं वही अपना बैग टाँगे सर पकड़ कर बैठ गया, जिसने भी मुझे मारा था उसने पूरी टाइमिंग और पॉवर के साथ मारा था, जिससे कि मेरे कान मे इस वक़्त सीटिया बजने लगी थी और पूरा सर दर्द के साथ झन्ना रहा था...कुछ  देर तक तो मैं वही नीचे अपने सर को पकड़ कर बैठा रहा और जब सामने की तरफ नज़र डाली तो कुछ  दिखा ही नही, सब कुछ धुंधला -धुंधला था. अपनी आँखो को रगड़ कर मैने सामने देखने की एक और कोशिश की लेकिन नतीज़ा पहले की तरह था,मुझे अब भी कुछ  नही दिख रहा था...
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"कौन..."बड़ी मुश्किल से मैं अपना सिर पकडे सिर्फ इतना बोल पाया....

जिसके बाद किसी ने मुझे पकड़ कर उठाया , मुझे उपर  दीपिका मैम ने उठाया था, क्यूंकी मैं उसके पर्फ्यूम की खुशबू को महसूस कर सकता था....

"मैम.. आप.."आँख बंद किये हुए ही अपना सिर दबाते हुए मैने कहा

"कैसे हो अरमान..."मेरे कंधो को सहलाते हुए R. दीपिका (रंडी दीपिका ) ने अपना मुँह खोला

"तुम पुछ  रहे थे ना कि मैने किसको कॉल किया था...? और तुम्हे आता देख कॉल डिसकनेक्ट क्यूँ की थी...? तो सुनो, मैने गौतम के फादर को कॉल करके ये बताया की उसका शिकार मेरे साथ है. मैने उन्हे इस दुकान का अड्रेस भी बताया और जब तुम्हे आते हुए देखा तो हड़बड़ाहट मे कॉल डिसकनेक्ट कर दी ताकि तुम्हे मालूम ना हो कि मैं किससे बात कर रही... अब तुम ये भी समझ गये होगे कि मैं तुम्हे क्यूँ जबरदस्ती यहाँ रोक रही थी..."

"50 दे बे साली, वेश्या ..."मैने कहा...

"क्या "

"प्रोटेक्शन,मै क्या तेरे बाप की दुकान से लाया हूँ.... चल निकाल 50 "दीपिका मैम  की तरफ हाथ बढ़ाते हुए मैने कहा, अब मुझे हल्का-हल्का कुछ  दिखने लगा था...

"इस सिचुयेशन मे तुम 50 माँग रहे हो.. रियली अरमान...??."

"हां , तू जल्दी से 50 दे..."

"ये ले भीखारी अपने 50 "अपने पर्स से एक नोट निकाल कर दीपिका मैम  ने मेरे हाथ मे थमा दिया...

"अब एक पप्पी भी दे दे..."

मैं नही जानता कि उस समय मेरी इन हरकतों से दीपिका और मुझे मारने आए गौतम के बाप के आदमी क्या सोच रहे थे,वहाँ आस-पास खड़े लोग क्या सोच रहे थे...उनका रिएक्शन  क्या था.... क्यूंकी मेरी आँखो के सामने इस वक़्त सब कुछ एकदम साफ नहीं था  और उस धुंधले-धुंधले नज़ारे मे किसी के फेस के रिएक्शन  को देख पाना मुमकिन नही था...

"लगता है दिमाग़ पर पड़ने से असर कुछ  ज़्यादा हो गया है..."

"मेरा चुसेगी तो सही हो जाएगा, ले चूस ना उस दिन की तरह..."

मैं ऐसी हरकत तीन वजह से कर रहा था पहला ये कि दीपिका का सबके सामने मज़ाक बना सकूँ, दूसरा इसी दौरान मुझे कुछ  सोचने के लिए थोड़ा टाइम मिल रहा था, तीसरा मैं इस जुगाड़ मे था कि कब मैं ठीक से देख पाऊ और देखते ही यहाँ से खिसक लूँ... उसके बाद दीपिका की कोई आवाज़ नही आई और जल्द ही मुझे सही से दिखना भी शुरू हो गया था...मैने देखा कि मुझे मारने के लिए एक नही.. दो नही बल्कि एक अच्छी-ख़ासी फौज आई थी. साला मैं कोई सूपर हीरो हूँ क्या,जो गौतम के बाप ने इतने आदमियो को भेज दिया

"यदि ज़िंदा बच गया तो तेरा जीना हराम कर दूँगा रंडी दीपिका, मेरा मतलब.. R. दीपिका. ये बात अपने शरीर के हर छेद मे ठूस ले... बच्चादानी तक मे, क्यूंकि यदि मै आज जिन्दा बच गया ना तो हाथ डालकर तेरा बचादानी निकाल लूंगा ..."स्कूटी के पास दीपिका को खड़ा देख कर मैने कहा...

"पहले ज़िंदा बच तो सही, चूतिए..."

"यदि भूल से भी मेरी आँख दोबारा खुल गई तो कॉलेज मे किसी को मुँह दिखाने लायक़ नहीं रहोगी... तेरी जिंदगी बर्बाद कर दूंगा ."

"अच्छा, पैर कब्र मे है लेकिन फिर भी दुनिया देखने की बात कर रहा है..."मुस्कुराते हुए दीपिका मैम  ने मुझे देखा और एक फ्लाइयिंग किस देकर वहाँ से चली गयी....

मुझे लाकर यहाँ फसाने वाली तो चली गयी थी ,अब मैं वहाँ अकेला बचा था. मैने आस-पास खड़े लोगो को देखा ,वो सब वहाँ खड़े मुझे देख तो रहे थे,लेकिन मेरी हेल्प करने के लिए उनमे से कोई भी आगे नही आया.... खैर ये कोई बुरी बात नही क्यूंकी अगर उनकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता,जो इस वक़्त वहाँ खड़े लोग कर रहे थे....

मैने एक नज़र मुझे मारने आए गुन्डो पर डाली और देखते ही दहशत मे आ गया. मुझे कैसे भी करके वहाँ से भागना था, लेकिन जिसने मेरे सर मे कुछ  देर पहले कसकर हमला किया था उसे मैं ऐसे ही नही छोड़ने वाला था... तभी मेरे गालो पर कुछ  महसूस हुआ और मैने अपने हाथ से अपने गाल को सहलाया तो मालूम चला कि मेरे सर पर कुछ  देर पहले जो रॉड पड़ा था उसकी वजह से ब्लीडिंग शुरू हो गई है....मैने अपने दूसरे हाथ से चेहरे और सर को सहलाया और जब मेरे दोनो हाथ मेरी आँखो के सामने आए तो उनपर  ताज़ा खून का लेप लगा हुआ था. सहसा मेरा खून मेरे माथे से होते हुए मेरी आँखो तक पहुचा. और मैने अपनी पलके झपकाई... .जिसके तुरंत बाद मैने डिसाइड किया कि मुझे अब करना क्या है. .गौतम के बाप के गुंडे कोई फिल्मी गुंडे नही थे जो एक-एक करके मुझसे लड़ने आते ,वो सब एक साथ मेरी तरफ बढ़े....कुछ  देर पहले जिसने मेरे सर पर रोड मारा था उसके हाथ मे वो रोड अब भी मौज़ूद था ,जिसे मज़बूती से पकड़े हुए वो मेरी तरफ बढ़ रहा था....

"तू तो गया आज कोमा मे..."चाय वाले की दुकान से मैने चाय की केटली उठाकर सीधा उसके सर पर ज़ोर से दे मारा जिसके हाथ मे मेरे खून से साना लोहे का रोड था.... लेकिन उसी दौरान आगे -पीछे, दाए -बायें से मुझपर भी एकाएक कई लात -घुसे पडे...

"Aaayyyiiii.... मरो साले हरामी को .."कराहते हुए उसने अपने साथियो से कहा और रॉड उसके हाथ से छूट गया
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उस हरामखोर के सर को चाय की केटली से फोड़ने के बाद उन सबके एक साथ हमले के कारण मार खाकर नीचे बैठ गया था.. मैने एक तरफ खड़े एक आदमी के पैर को अपने हाथो से बैठे -बैठे पकड़ा और उठाकर सीधे ज़मीन मे जोर से पटका.. इस दौरान फिर से उसके अगल -बगल वालों ने मुझओर लात -घुसे बरसाए... Jisके कारण मै थोड़ा दूर फेकाया और जैसे मै दूर फेकाया... मै अपनी रूह की पूरी ताक़त लगाकर वहाँ से भगा... पहले तो कुछ देर तक बैठे -बैठे ही,ज़मीन मे जानवरो कि तरह चलते हुए फिर खड़ा होकर.... भागे तो वो भी मेरे पीछे, लेकिन मेरी रफ़्तार और उनकी रफ़्तार मे इस समय खरगोश और कछुये के दौड़ के बराबर फासला था...साले मोटे भैंसे... नेशनल प्लेयर को पकड़ेंगे ये.. 15-20 km रोज दौड़ने कि प्रैक्टिस है मेरी.

"आ जाओ लल्लूओ , तुम लोगो को शायद पता नही कि मैने पैदा होने के बाद चलना नही डाइरेक्ट दौड़ना शुरू किया था,इस खेल मे तो तुम्हारा बाप भी मुझे नही हरा सकता..."भागते हुए उनकी तरफ पलटकर मैने उन सबका मज़ाक उड़ाया और फिर से तेज़ रफ़्तार मे दौड़ने लगा.....

गौतम के बाप के गुन्डो की लगभग आधी फौज पीछे रह गयी थी और जो बचे हुए आधी फौज मेरा पीछा कर रही थी ,उनकी हालत भी मरे हुओ की तरह थी, सब मुँह फाड़कर मेरे पीछे हाफ्ते हुए दौड़ रहे थे. अब मुझे इस भाग-दौड़ मे मज़ा आ रहा था क्यूंकी भागते वक़्त बीच-बीच मे मैं रुक जाता और पीछे मुड़कर उन गुन्डो को माँ-बहन की गन्दी -गन्दी गालियाँ देता,जिससे वो फिर से गुस्से मे मेरे पीछे भागने लगते. और मै फिर उबसे बहुत आगे हो जाता. इसी भागम-भाग के बीच उन गुन्डो मे से कुछ  ज़मीन पर दौड़ते -दौड़ते गिर गये, तो कुछ  जहाँ थे वही किसी चीज़ का सहारा लेकर खड़े हो गये... अब मेरे पीछे सिर्फ़ 4-5 लोग ही थे. जिन्हे भगा -भगा कर ही लुढ़काने का मेरा प्लान था. भागते हुए मैं एक पतली गली मे घुसा और बड़े से घर की दीवार पर खुद को टिका कर आराम करने लगा. लेकिन जो 4-5 लोग मेरे पीछे पड़े थे वो भी हान्फते हुए वहाँ पहुच गये जिसके बाद मैने उस बड़े घर का गोल-गोल राउंड लगाना शुरू कर दिया और बाकी बचे उन 4-5 लोगो को भी लगभग अधमरा सा कर दिया..... जिसके कारण वो एक जगह दीवार की टेक लेकर हाँफने लगे

"उसैन बोल्ट को जानता है..."उनके एकदम पास बगल मे जाकर खड़ा होते हुए मैने पुछा, क्यूंकी मुझे मालूम था कि वो जब खुद को नही संभाल पा रहे है तो मुझपर क्या खाक हमला करेंगे...

"नही ,कौन उसेन बलत...हह..."एक ने हान्फते हुए कहा

"साले, यदि तू हां मे जवाब देता तो एक सॉलिड डाइलॉग मारता...अनपढ़ बकलोल .."कहते हुए उसके जबडे पे मैने अचानक एक मुक्का मारा

"ईईए...."वो मरी हुई आवाज़ मे चीखा

"चल बे ,साइड चल..."उसको ज़मीन पर गिराते हुए मैं वहाँ से फिर भगा .....
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"ये सही जगह है...यहाँ तोड़ा आराम कर लेता हूँ..."अपने सर पर हाथ फिराते हुए मैने खुद से कहा , ब्लीडिंग रुक चुकी थी और मैं अब तक होश मे था...जिससे मुझे राहत मिली ,लेकिन सर अब भी रोड के जोरदार प्रहार से दुख रहा था....मैं इस वक़्त एक छोटे से ग्राउंड मे था,जहाँ कुछ  लड़के क्रिकेट खेल रहे थे.... पर जबसे रुका था,तब से मेरा मन मचल रहा था.. मेरा दिमाग़ हल्का हल्का घूम रहा था.. या फिर ये कहु की यही वजह थी जो मैने यहाँ रुक कर आराम करने का सोचा

"पानी है क्या...पानी"क्रिकेट खेलने वालों के पास पहुच कर मैने उनसे पानी माँगा...

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